हिमाचल में बढ़ता खनन माफिया का जाल
देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, नदियों, पहाड़ों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से प्रदेश में असीमित तरीके से अवैध खनन (Illegal Mining) बढ़ा है, उसने हिमाचल की सुरक्षा और भविष्य दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
विकास के नाम पर हो रहा यह अंधाधुंध खनन अब एक संगठित खनन माफिया के रूप में उभर चुका है, जो पर्यावरण, कानून और स्थानीय लोग – तीनों को कुचल रहा है।
हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बीजेपी विधायक सुरेंद्र शौरी और कांग्रेस विधायक केवल पठानिया ने अवैध खनन और खनन को लेकर सवाल पूछा था.
दोनों ने सदन में उद्योग मंत्री से सवालल पूछा था कि 1 जनवरी, 2023 से 31 जुलाई, 2025 तक प्रदेश में अवैध खनन के कितने मामले दर्ज किए गए और इन पर क्या कार्रवाई की गई. कितनी मशीनें और वाहन ज़ब्त किए गए और कितने चालान किए गए.
हिमाचल प्रदेश गौण खनिज़ ( रियायतें) और खनिज ( अवैध खनन, उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 के नियम 72 के अन्तर्गत विभाग दिनांक 01 जनवरी, 2023 से 31 जुलाई, 2025 तक अवैध खनन के कुल 1108 मामले दर्ज किये गये हैं, जिनमें 711 मामलों में विभाग ने 1,80,00,375/- रूपये का जुर्माना वसूला गया है. इस दौरान 395 मामले माननीय न्यायालय में दायर किये गये है, जिनमें 128 मामलों में माननीय न्यायालय ने 57,72,500 /- रूपये का जुर्माना वसूला है, और 269 मामले माननीय न्यायालय में लम्बित हैं. विभाग ने इस दौरान 99 जेसीबी एवं 7 वाहन भी जब्त किये हैं.
खनन माफिया क्या है?
यह एक ऐसा संगठित तंत्र है जिसमें ठेकेदार, स्थानीय प्रभावशाली लोग और कुछ अधिकारी शामिल होते हैं जो राजनैतिक संरक्षण के अन्तगर्त कार्य करते हैं। यह माफिया नियमों को ताक पर रखकर नदियों से रेत-बजरी, पहाड़ों से पत्थर और जंगलों से संसाधन निकालता है। अक्सर यह गतिविधियाँ रात के अंधेरे में होती हैं ताकि कोई विरोध न कर सके।
हिमाचल में अवैध खनन क्यों बढ़ रहा है?
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निर्माण कार्यों की बढ़ती मांग – सड़कों, सुरंगों, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और भवनों के कारण रेत-बजरी की भारी मांग
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कमज़ोर निगरानी तंत्र – सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण प्रभावी निगरानी नहीं हो पाती
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राजनीतिक संरक्षण – कई मामलों में माफिया को परोक्ष संरक्षण मिलने के आरोप
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गरीबी और बेरोज़गारी – स्थानीय लोग मजबूरी में इस अवैध काम से जुड़ जाते हैं
पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव
अवैध खनन का सबसे बड़ा नुकसान हिमाचल के पर्यावरण को हो रहा है।
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नदियों का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है
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भूस्खलन (Landslides) की घटनाएँ बढ़ रही हैं
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भूजल स्तर गिर रहा है
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जंगल और जैव विविधता नष्ट हो रही है
2023 की भीषण आपदा ने यह साफ कर दिया कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम कितना भयावह हो सकता है।
स्थानीय लोगों की पीड़ा
खनन माफिया का सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ता है। खेतों में रेत भर जाती है, पानी के स्रोत सूख जाते हैं, और कई जगह लोगों को अपने घर छोड़ने तक की नौबत आ जाती है। विरोध करने वालों को धमकाया जाता है, और कई मामलों में हिंसा तक देखी गई है।
प्रशासन और कानून की भूमिका
सरकार समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद भी स्थित दिन ब दिन बद्तर होती जा रही है और खनन माफिया बेलगाम हो कर खनन को अंजाम दे रहा है। अब इसके पिछे कौन कौन दोषी है इसके पता लगाना पुलिस प्रशासन का काम है।
आगे का रास्ता
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अवैध खनन पर Zero Tolerance नीति
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स्थानीय समुदायों की भागीदारी
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तकनीक आधारित निगरानी (ड्रोन, GPS ट्रैकिंग)
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पर्यावरण संरक्षण को विकास से ऊपर रखना
निष्कर्ष
हिमाचल सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि खनन माफिया का यह जाल यूँ ही फैलता रहा, तो देवभूमि का स्वरूप बदलने में देर नहीं लगेगी। अब समय आ गया है कि सरकार, प्रशासन और समाज – तीनों मिलकर यह तय करें कि हमें विकास चाहिए या विनाश।
प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।
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