देवता और पालकी : आस्था की चलती फिरती परम्परा
हिमाचल की आत्मा जागती है कब, जब रणसिंघा गूंजता है, ढोल बजते हैं और पालकी में सवार देवता गांव की गलियों से गुज़रते हैं। हिमाचल क्यों हैं देवभूमि हिमाचल देवों के देव महादेव की तपोभूमि है, माँ पार्वती का जन्मस्थान है। इसी पवित्र भूमि पर भगवान भोलेनाथ और आद्याशक्ति देवी पार्वती का विवाह हुआ था। यही वो पावन भूमि है जहाँ माता सती के दिव्य अंग गिरे थे और ५१ शक्तिपीठों में से 5 यहीं स्थापित हैं जो कि क्रमशः इस प्रकार हैं माँ ज्वालामुखी, चामुंडा देवी, चिंतपूर्णी देवी, नैना देवी और ब्रजेश्वरी देवी। ये बाबा बालकनाथ जी की धरती है जो कि गुजरात से आए और जिला विलासपुर की धरती को अपनी तपोभूमि बनाया। इसके अलावा यहाँ प्रत्येक गाँव , हर क्षेत्र , और हर परिवार का कोई ना कोई अपना देवता होता है। ये देवता केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के जीवन में सजीव उपस्थिति रखते हैं कभी निर्णायक , कभी रक्षक , और कभी मार्गदर्शक बनकर। हिमाचल प्रदेश में कई प्रसिद्ध देवता हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: महासू देवता: शिमला के ऊपरी भागों और सिरमौर जिले के कुछ हिस्सों में ...