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प्रकृति बनाम मानव: क्यों रो रहा है हिमाचल?

पहाड़ रो रहे हैं, नदियाँ विलाप कर रही हैं, और वादियों में सन्नाटा पसरा है। यह हिमाचल की वह तस्वीर है, जिसे हमने अपने ही हाथों बिगाड़ा है। कभी स्वर्ग समान दिखने वाली यह धरती आज भूस्खलन, बाढ़ और टूटी हुई सड़कों की मार झेल रही है। प्रकृति और मानव के बीच यह संघर्ष कोई अचानक शुरू नहीं हुआ — यह वर्षों के लालच, अनियंत्रित निर्माण और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का परिणाम है। सवाल यह है कि क्या अब भी हम जागेंगे, या फिर हिमाचल की ये कराहें केवल इतिहास बनकर रह जाएंगी? 20 जून 2025 से अब तक (14 अगस्त 2025) अलग-अलग बुलेटिन्स में कुल मौतें 192–241 > के बीच रिपोर्ट हुई हैं। SDMA/एजेंसी रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें से लगभग आधी मौतें सीधे भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, क्लाउडबर्स्ट, ढहती दीवार/घर जैसी बारिश-संबंधित घटनाओं से हैं, शेष रोड एक्सिडेंट्स/अन्य कारणों से। सैकड़ों सड़कों का बंद होना, ट्रांसफॉर्मर रीजन और पेयजल योजनाएँ बार-बार ठप — उदाहरण के लिए, हाल की बंदी के दौरान 452 सड़कें बाधित रहीं; मांड़ी-कुल्लू के बीच चंडीगढ़-मनाली हाईवे 60 घंटे तक बंद रहा। जुलाई-अगस्त में कई क्लाउडबर्स्ट और लैंडस्लाइड —कुल्लू, ...