कांगड़ा में आया 4.3 रिक्टर स्केल का भूकंप: क्या यह प्रकृति का एक संकेत है?
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में बीते शुक्रवार रात्रि 10 बजकर 4 मिनट पर 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र धर्मशाला से लगभग 18 किलोमीटर दूर बताया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। भूकंप के झटके कांगड़ा के अलावा हरियाणा के पंचकूला और चंडीगढ़ तक भी महसूस किए गए। हिमाचल प्रदेश भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील ज़ोन-5 में स्थित है, जहाँ समय-समय पर भूकंप आना सामान्य भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। फिर भी हर झटका हमें एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने पर विवश करता है— क्या हम पहाड़ों के साथ न्याय कर रहे हैं? बीते कुछ वर्षों में विकास के नाम पर हिमाचल के पहाड़ों को जिस गति से काटा जा रहा है, वह चिंता का विषय है। चौड़ी होती सड़कें, ऊँची-ऊँची इमारतें, होटल, रिसॉर्ट और होम-स्टे सुविधाएँ पर्यटन को तो बढ़ा रही हैं, लेकिन क्या हम इन पहाड़ों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) का भी ध्यान रख रहे हैं? पहाड़ केवल पत्थरों का ढेर नहीं होते। वे असंख्य पेड़ों, नदियों, झरनों, वन्य जीवों और लाखों लोगों के जीवन का आधार हैं। जब एक पहाड़ काटा...