दीपों की दीवाली


आई दिवाली खुशियों वाली,
रंग, रोशनी, मिठाइयों वाली।
हर आंगन में जगमग उजियारा,
हर दिल में प्रेम का प्यारा सहारा।

चौदह वर्ष का वनवास पूरा,
लक्ष्मण, सिया संग लौटे राम।
दीपों से दमक उठा अयोध्या,
गूंज उठा जय श्रीराम का नाम।

अमावस की काली चादर,
अब दीपों से जगमगाई है।
हर घर में उत्साह की लहर,
हर आंख में रौशनी छाई है।

पटाखे जलें, हँसी के संग,
खुशियों की गूंज मचाएं हम।
इस दीवाली मिल-जुलकर,
हर साल उजाला फैलाएं हम।

और याद रखें एक स्नेहिल बात,
जो पुरखों से जुड़ी परंपरा है साथ —
श्राद्ध के बाद जब पितर लौटें अपने लोक,
पटाखों से दिखाते हम उनका मार्ग आलोक।

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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